papita का पौधा लगाने का समय जुलाई अगस्त , से अक्टूबर नवंबर और फरवरी मार्च इन तीनों सीजन में papita बोया जाता है , पपीते की अच्छी किस्म ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म का चुनाव करे , जिससे अधिक से अधिक उत्पादन हो सके , किस्म वैरायटी जैसे की रेड लेडी 786, ग्रीन बेरी , पूसा माइजेस्टी, ताईवान जैसी हाइब्रिड शामिल है , ऐ किस्म ज्यादा से ज्यादा पैदावार देने वाली होती है , और ऐ किस्म काफी अच्छी मानी जाती है । पपीते की खेती के लिए बीज की लागत प्रति एकड़ लगभग , 200 से 250 ग्राम तक की मात्रा होती है ।

papita ki खेती की तैयारी और देखभाल
papita की खेती करने की लिए खेत की अच्छी तरह खेत को तैयार करें , खेत को तैयार करने के लिए खेत को अच्छी तरह दो से तीन बार गहरी जोताई करें , साथ में पाटा लगाएं , और खेत को समतल करें और अच्छी तरह भुरभुरी बना लें , जल निकासी खेत की अच्छी होनी चाहिए , खेत की तैयारी के साथ साथ गोबर की सड़ी हुई गोबर की खाद , ssp खाद और जिप्सम भी मिला सकते है , इससे मिट्टी की उर्वरता काफी अच्छी होती है , पपीते की खेती के लिए मिट्टी का प्रकार , जैसे काली मिट्टी , हल्की भूमि , बुलई दोमट मिट्टी काफी उपजाऊ मिट्टी मानी जाती है । मिट्टी का ph 5.5 से 6.5 तक अच्छा होता है । पपीते की खेती के लिए तापमान 18°c डिग्री सेल्सियस से 38°c सेल्सियस तक अच्छा माना जाता है ।
पपीते की रोपण विधि , पपीता के पौधा को रोपने के लिए बैड क्यारियां काफी अच्छा होता है , खेत में बैड बनाने के लिए बैड से बैड की दूरी 5 से 7 फिट तक और बैड की चौड़ाई 2 से 3 फिट तक , बैड की ऊंचाई 1 से 1.5 तक होना चाहिए बैड की तैयारी और पौधा रोपण के समय खाद का प्रयोग , DAP , 50 किलोग्राम खाद , SSP , 90 से 100 किलोग्राम , MOP खाद , 30 से 35 किलोग्राम , जिप्सम 25 से 30 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग कर सकते है । पपीते की रोपाई के करने के बाद पौधे को सहारा दें , सहारा देने के लिए छोटी छोटी लकड़ी लगाएं , क्योकि पौधा हवा में झुके या टूटे न ,
सिंचाई प्रबंधन
पपीते की सिंचाई रोपाई के दो से तीन दिन बाद सिंचाई करें , इसके बाद 10 से 15 दिन के अंतराल में सिंचाई करते रहें , गर्मियों के दिन में सिंचाई की जरुरत ज्यादा होती है । 3 से 4 दिन सिंचाई की जरुरत होती है । पपीते में आने वाली समस्या नेमिटोड़स की समस्या पौधे की जड़ों को नुकसान पहुँचती है , नेमिटोड़स से पौधा भोजन नहीं बना पाता है । जड़ों में गाठे बनने लगती है , और इससे पौधा कमजोर हो जाता है , इसके लिए , velum prime 400 से 500 ml सिंचाई के समय प्रयोग करें , इसको प्रयोग करने के बाद नेमिटोड़स की समस्या नहीं होगी , पपीते की फसल खपपतवार नियंत्रण , फसल में होने वाले खरपतवार को समय समय पर निराई गुड़ाई करें , इससे खरपतवार नहीं होगा , और खरपतवार नहीं होगा तो पौधे में अच्छा विकास होगा , Papita k
पपीते में लगने वाले फंगस कीट से बचाने के लिए , Bayer solomon 10 ml. Bayer Antracol 40 gr , Syngenta Quantis 40 ml , 15 लीटर पानी के साथ स्प्रे करें लगने वाले कीट फंगस से सुरक्षा मिलती है । और पौधा स्वस्थ रहता है । जितना पौधा स्वस्थ रहेगा उतना ही पैदावार अच्छा होगा । पपीते के पौधे में खाद देने का समय , जब पौधा 40 से 50 दिन का हो जाए तो यूरिया 30 किलोग्राम , DAP, 25 किलोग्राम , MOP , 25 किलोग्राम , Micronutrients fertilizers, 5 किलोग्राम , सागरिका 10 कोलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से खाद को बीच बीच में 80 से 120 दिन के अंतराल में इन सभी खादों को डालें । पपीते का पौधा लगाने के 10 से 12 महीने के बाद पपीते का फल तैयार हो जाता है , तैयार होने के बाद हल्का पीला पड़ जाता है । और फल तोड़ने के लिए तैयार हो जाता है ।
