Amla ka ped kab lagana chahiye , आंवले का पेड़ जुलाई से सितंबर के महीने में लगाया जाता है । आंवले का पेड़ लगाने के 5 से 7 साल के बाद फल देने लगता है । आंवले की खेती के लिए नम जलवायु और शुष्क जलवायु उपयुक्त मानी जाती है । आंवले की खेती के लिए 20°c डिग्री सेल्सियस से 30 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है ।

amla ka ped lgane ke लिए मिट्टी और किस्म
आंवले की खेती के लिए मिट्टी का प्रकार , काली मिट्टी , काली दोमट , बुलई मिट्टी , चिकनी मिट्टी , आंवले की खेती के लिए ज्यादा उपयुक्त होती है । मिट्टी का ph 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए । खेती करने के लिए खेत की अच्छी तैयारी करना बहुत जरुरी होता है । खेत को तैयारी करने के लिए खेत की अच्छी तरह जोताई 3 से 4 बार खेत की गहरी जोताई करें , जोताई के साथ साथ पाटा लगाएं , खेत को अच्छी तरह भुरभुरी बनालें , खेत में जल निकासी अच्छी होनी चाहिए , खेत की तैयारी करते समय मिट्टी की उर्वरता और पौधे के जरुरत के अनुसार खाद देना जरुरी होता है । जैसे की गोबर की खाद , नीम की खली खेत की तैयारी के समय खेत में मिलाना दें , इससे मिट्टी के पोषक तत्व की कमी को पूरा करती है । और मिट्टी की उर्वरता , फसल की पैदावार बढ़ाने में मदद करती है । Amla ka ped kab
आंवले की उन्नत किस्म
आंवले की खेती करने के लिए उन्नत किस्मों का चयन करना बहुत जरुरी होता है , मुख्य किस्में , NA6, NA7. NA10 कृष्णा , चकइया फ्रांसिया जैसे किस्म को उत्पादन अच्छा देखने को मिलता है । आंवले का पौधा लगाने के लिए जमीन में गड्ढे का निर्माण करना बहुत जरुरी होता है । गड्ढा 2χ2 का होना चाहिए , गड्ढा तैयार होने के बाद 10 से 15 दिन तक खुला छोड़ दें , 15 दिन बाद गड्ढे में जैविक खाद रासायनिक खाद डालें जैसे की गोबर की खाद , सिंगल सुपरफ़ॉस्फ़ेट, वर्मी कम्पोस्ट प्रति गड्ढे के हिसाब से डाल दें , और गड्ढे को मिट्टी से भर दें , गड्ढा तैयार होने के बाद , अच्छा पौधा का चुनाव करके लगादें , पौधा लगाने के तुरंत बाद सिंचाई करे , इसके बाद नियमित सिंचाई 15 से 20 दिन के अंतराल में सिंचाई करें , पौधे की सिंचाई , मौसम , जलवायु , और मिट्टी के हिसाब से पौधे की सिंचाई करें ।

आंवले के पौधे में लगने वाले कीटों से बचाये , आंवले के पौधे लगने वाले कीट जंग रोग , तना छेदक जैसे कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है । इससे बचाने के लिए , थाइथेन जेड 78 के टेबलेट सल्फर का उपयोग करके पानी में मिलाकर छिड़काव करें , जंग रोग जैसे कीटों से बचाव करता है , और तना छेदक जैसे रोग से बचाने के लिए क्लोरोपायरीफास जैसे दवाई का उपयोग , पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें , इन कीटनाशक दवाओं का उपयोग करके लगने वाले कीटों से बचाया जा सकता है । पौधा जितना स्वस्थ रहेगा , उतना ही पौधे का विकास देखने को मिलेगा ।
आंवले की खेती भारत के कई राज्यों में की जाती है , आंवले में औषधीय गुण विटामिन की मात्रा भरपूर पाई जाती है । आंवले का उपयोग कई कामों किया जाता है । जैसे की शैम्पू , तेल , दातों में लगाने वाला पाउडर , चेहरा में लगाने वाली क्रीम भिविन्न कामों में उपयोग किया जाता है । इसका फल पीले रंग का होता है ।
