Gehu ki kheti , में कम लागत में ज्यादा पैदावार

Gehu ki kheti , भारत के किसानों के लिए रबी सीजन की प्रमुख फसल होती है , गेहू की फसल की तैयारी के लिए अक्टूबर महीने से नवम्बर तक बहुत उचित समय माना जाता है , अक्टूबर महीने के बाद गेहूं की  बुवाई को लेकर खेतों की तैयारी शुरू हो जाती है , गेहूं की फसल में  अच्छी गुणवत्ता और उत्पादन के लिए सही समय , खाद उर्वरक और बीज की उन्नत किस्म बहुत महत्त्वपूर्ण होता है ,

Gehu ki fasal

 Gehu ki kheti की तैयारी और उचित समय

 

गेहूं की बुवाई का उचित समय अक्टूबर से 15 नवम्बर तक बहुत जरुरी समय माना जाता है , इस बीच में गेहूं की बुवाई का अनकूल समय होता है , और सही समय पर गेहूं की गई बुवाई से फसल में  अधिक से अधिक पैदावार लिया जा सकता है , सबसे पहले तो खेत की तैयारी बहुत जरुरी चरण होता है इसके लिए जब खेत खाली हो जाए तो  खेत में मौजूद खरपतवार को अच्छी तरह से नस्ट कर दें , इसके बाद खेत की गहरी जोताई करे और सूखे खेत की सिंचाई करें ताकि खेत में पर्याप्त नमी रहे क्योंकि गेहूं की बीजों का अच्छे से अंकुरण हो सके । सिंचाई  बोर बेल या नहर के माध्यम से खेत की सिंचाई करें । सूखे खेत की सिंचाई के कुछ दिन के बाद जब हल्का खेत सूख जाए तब खेत की जोताई करें और जोताई के साथ  खेत में गोबर की खाद डाल कर खेत को अच्छी तरह से तैयार करें ।

 

Gehu ki kheti के लिए आद्रत जलवायु और 15°c डिग्री सेल्सियस से 38°c सेल्सियस तक तापमान उपयुक्त होता है , क्योंकि गेहूं की फसल जितना ठंडी और नमी रहेगी उतना ही अच्छा गेहूं की फसल के लिए बेहतर होता है , और गेहूं की फसल का उत्पादन सभी प्रकार के मिट्टी में किया जा सकता है , जैसे  की काली मिट्टी , दोमट मिट्टी , लाल मिट्टी , रेतीली मिट्टी ऐ सभी प्रकार की मिट्टी में गेहूं की खेती की जा सकती है । मिट्टी का ph  5.5 से 6.5 तक अच्छा माना जाता है

 

गेहूं की उन्नत किस्म

 

गेहूं की फसल में बेहतर पैदावार के लिए बीजों का भी उन्नत किस्म का चुनाव करना  बहुत जरुरी कदम होता है , गेहूं की उन्नत किस्म , श्रीराम 303 , श्रीराम 463 , Hi 8663 , पूषा तेजस ,श्रीराम 322 , Hd 2967 , ऐ किस्म भारतीय गेहूं और जौव अनुसंधान द्वारा विकसित की गई किस्म है ऐ सभी किस्म अच्छी गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधी किस्म  होती है । और बुवाई के लिए बीज की मात्रा 50 से 60 किलोग्राम प्रति एकड़ तक होती है । गेहूं की फसल में कीट फंगस जैसी समस्या के लिए बोजों का बीज उपचार करना बहुत जरुरी होता है । स्ट्रेप्टो साइक्लिन 40 ग्राम और 300 ग्राम नमक 20 लीटर पानी में घोल बनाकर गेहूं के बीज को डूबकर बीज का उपचार करें , और बीजों का उपचार करें के  बीज को बुवाई के लिए  तैयार करें ।

 

गेहूं की बुवाई के समय खादों का प्रयोग , DAP खाद 30 किलोग्राम , SSP दानेदार 50 किलोग्राम , यूरिया खाद 20 से 25 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से खादों का प्रयोग करके खेत की बुवाई करें । और बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 5 से 6 सेंटी मीटर , लाइन से लाइन की दूरी 8 सेंटी मीटर और बीज की बुवाई की गहराई 5 सेंटी मीटर उपयुक्त होती है

 

गेहूं की फसल में पहली सिंचाई 20 से 22 दिन के अंदर सिंचाई करें , और इसके बाद 20 से 25 दिनों में गेहूं की सिंचाई करते रहें , गेहूं की फसल की जरुरत के हिसाब से सिंचाई करें , और गेहूं की फसल 5 से 6 सिंचाई में तैयार हो जाती है , गेहूं की फसल में सिंचाई करते समय पानी का भराव न हो ऐ भी ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है ,  क्योंकि पानी का भराव होने से फसल को भारी नुकसान होता है , और फसल की उत्पादन और गुणवत्ता पर बहुत कमी हो जाती है , इस लिए खेत में पानी की निकासी अच्छी हो ।

Gehu ki fasal

गेहूं की फसल में होने वाले खरपतवार ,   जैसे की सकरी पत्ती ,चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार गेहूं की फसल में खूब देखने को मिलते है और खरपतवार होने से फसल के उत्पादन में बहुत कमी होती है  इसके लिए खरपतवार नाशक ( UPL Vesta पोस्ट इमर्जेंट 160 ml 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें , जब गेहूं की फसल 20 से 25 दिन की हो जाए , गेहूं की अच्छी देखभाल करके  ज्यादा से ज्यादा उत्पादन लिया जाता सकता है , गेहूं की फसल तैयार होने में लगभग 100 से 120 दिन में पक कर तैयार हो जाती है ।

 

 

 

 

 

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