Ageti muli की खेती से कम समय में अच्छी आमदनी लिया जा सकता है , मूली की खेती करने से दो तरह के फायदे देखने को मिलता है , पहला खेती करने में लागत कम आती है और दूसरा कम से कम समय में मूली की फसल तैयार हो जाती है । मूली की फसल में जितनी लागत आती है , उससे 4 से 5 गुना मुनाफा होता है , बरसात के सीजन में मूली की फसल में मंडी थोक भाव भी अच्छा मिलता है , लेकिन मूली की खेती का समय रबी सीजन उपयुक्त समय होता है रबी सीजन में मूली का स्टॉक मंडी में बहुत ज्यादा मात्रा में होता है और मूली का थोक भाव बहुत ही कम देखने को मिलता है ।

Ageti muli की फसल और खेत की तैयारी
खेत की तैयार के साथ गोबर की खाद का छिड़काव करें और खेत की गहरी जोताई बारिश के सीजन में मूली की खेती के लिए उस खेत का चुनाव करना होता है , जहां पर मूली की खेती करनी होती है , उस खेत में पानी का भराव न हो क्योकि पानी का भराव होने से मूली की जड़ों में काफी नुकसान होता है , इस लिए खेत की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए की बारिश होने के बाद खेत का सारा पानी एक साथ निकल जाए मूली की बुवाई के लिए बैड विधि से करना ज्यादा बेहतर होता है , बैड विधि के माध्यम से बुवाई करने से जड़ों का विकास अच्छे से हो पाता है ।
बारिश के सीजन में मूली की उन्नत किस्म , (Mahyco Mahy 22 Radish) (Syngenta lvory white Radish) इन दोनों किस्मों का चुनाव कर सकते है , जो की बरसात के सीजन के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है , और Mahyco Mahy 22 Radish 60 से 65 दिन में तैयार हो जाती है , जड़ों का आकार काफी शानदार होता है , और Syngenta lvory white Radish ऐ किस्म 40 से 45 दिन की अवधि में तैयार हो जाती है , और इस बीज का चुनाव गर्मी , ठंडी , बरसात तीनों सीजन में किया जा सकता है ।
baid तैयार करने के लिए हल की मदद से हल्के और छोटे छोटे बैड तैयार करें ए एक बैड से दूसरे बैड की दूरी 40 से 45 सेंटीमीटर और बैड की ऊंचाई 15 से 18 सेंटीमीटर तक रखें बैड तैयार होने के बाद बैड के ऊपर मूली के बीजों की बुवाई करें बीज अंकुरण के बाद जब पौधे पर दो से चार पत्तियां आजाएं तब पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेंटीमीटर तक रखें और बाकी बचे हुए पौधे को उखाड़ कर निकाल दें । अगर मिट्टी में दीमक की समस्या देखने को मिलती है तो मूली की बुवाई से पहले बैड बनाने के समय (Carbofuran 3% CG ) 3 से 4 किलोग्राम प्रति एकड़ के दर से मिट्टी में डाल दें ।
मूली की फसल में खरपतवार नियंत्रण , फसल की अच्छी बढ़वार और विकास के लिए खरपतवार को नस्ट करना बहुत जरुरी होता है , इसके लिए (Pendimethalin 30%EC) 1 लीटर , 250 लीटर पानी में घोल बनाकर मूली की बुवाई से पहले प्रति एकड़ के दर से स्प्रे करें ।
मूली की फसल में लगने वाले कीट
मूली की फसल में काली सुंडी जैसे कीट का प्रकोप देखने को मिलता है , ऐ कीट मूली की पतियों को खाकर छेद बना देते है , मूली का पौधा पत्तियों के माध्यम से भोजन ग्रहण करता है और इसे जड़ों तक पहुंचाता है , लेकिन कीट जब पत्तियों को खा कर छेद बना देते है तो भोजन ग्रहण नहीं हो पाता है और पत्तियां मुरझाकर सूख जाती है , इस कीट के नियंत्रण के लिए ( Malathion 50%EC 15ml) 15 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करे , 10 से 15 दिन के अंतराल में एक से दोबार स्प्रे करें । ऐ स्प्रे सुंडी के साथ साथ माहू ,चेपा और एफिड जैसे कीटों को भी नियंत्रित करता है ।

मूली की फसल में इन कीटों के आलावा भी फंगस जनित रोग जैसे की फलाईस्पेक का अटैक होता है , और मूली के पत्तों में पीले पीले धब्बे दिखाई देते है , इस बीमारी का प्रकोप फलाईस्पेक के कारण ही दिखाई देते है । इसके नियंत्रण के लिए ( Carbendazim 12% +Mancozeb 63%WP) 4 से 5 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर स्प्रे करें , फसल में होने वाले फंगस जनित रोगों जैसी समस्या नहीं होगी , और फसल अगर रोग मुक्त रहती है तो Ageti muli का उत्पाद प्रति एकड़ 55 से 60 क्विंटल तक का उत्पादन होता है ।
