Aalu ki kheti karen सितंबर में कम खर्चे में होगी अच्छी पैदावार

Aalu ki kheti karen , आलू की फसल  बहुत महत्वपूर्ण सब्जी में से एक है , भारत के अलग अलग राज्यों में आलू की खेती की जाती है । आलू की खेती लगभग सभी तरह के मिट्टी में किया जा सकता है ,  अगर बुलई दोमट , रेतीली टोमट मिट्टी है तो आलू का उत्पादन और ज्यादा बेहतर होता है , आलू की फसल में अच्छा उत्पादन लेने के लिए मिट्टी में पोषक तत्व का होना बहुत जरुरी होता है । खेत की जल निकासी अच्छी होनी चाहिए , मिट्टी का ph 5.5 से 6.5 तक अच्छा होता है , इसके लिए तापमान , 20°c से 25° डिग्री सेल्सियस तक उपयुक्त होता है । आलू की खेती  करने का उचित समय सितंबर से अक्टूबर तक ज्यादा उपयुक्त माना जाता है । और मिट्टी में उचित नमी होना चाहिए ,

Aalu ki kheti se karen achhi paidawar

Aalu ki kheti की तैयारी और देखभाल

 

आलू की खेती करने के लिए खेत की तैयारी , खेत का गहरी जोताई दो से तीन बार करें , जोताई के साथ पाटा लगाएं , खेत को अच्छी तरह से भुरभरी बनालें , खेत की तैयारी के समय पोषक तत्व की कमी को पूरा करें , खेत में  गोबर की खाद का छिड़काव ,( DAP 1846 खाद) ( MOP खाद ) मिट्टी के पोषक तत्व के कमी के हिसाब से डालें । इससे मिट्टी की उर्वरता अच्छी होती है । और फसल की पैदावार अच्छी होती है । आलू को लगाने से पहले आलू का बीज उपचार करना बहुत जरुरी होता है । बीज उपचार करने से आलू की फसल में होने वाली कीट फंगस की समस्या कम होती है । ( Xelora fungicide) (trichoderma fungicide) जैसे दवाईओं का प्रयोग करके बीज उपचार करें । 

 

आलू की खेती करने के लिए किस्म वैरायटी का का चुनाव करना बहुत जरुरी होता है । आलू की किस्म वैरायटी , (बादशाह कुफरी ) यह आलू की किस्म का रंग सफ़ेद होता है ।  ( कुफरी चिप्सोना) यह सफ़ेद क्रीम रंग की होती है , इसका उपयोग चिप्स बनाने में ज्यादा मात्रा में उपयोग  किया जाता है । ( पुखराज कुफरी ) इसका रंग हल्का पीला होता है । ( कुफरी हिमसोना ) ऐ किस्म पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ज्यादा उपयुक्त होती है ।( कुफरी ख्याति ) यह किस्म मैदानी क्षेत्रों के लिए ज्यादा अच्छी  मानी जाती है । ( कुफरी मोहन) ऐ सभी आलू बीज की  वैरायटी अच्छी उत्पादन देने वाली मानी जाती है ।

 

आलू लगाने के लिए बेड तैयार करना ज्यादा जरुरी होता है । बेड की चौड़ाई 2.5 फीट और बेड की ऊंचाई 1 फीट और बेड से बेड की दूरी 3 फीट तक होना चाहिए  । आलू का बीज 6 से 7 सेंटी मीटर की गहराई पर लगाएं , आलू की बीज लगाने के बाद हल्की सिंचाई करें , इसके बाद सिंचाई 8 से 10 दिन के अंतराल में सिंचाई करते रहें । मिट्टी में नमी नमी का रहना  बहुत जरुरी होता है । इससे पौधे के विकास में कोई रूकावट नहीं होती है , फसल तैयार होने से  10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें । Aalu ki kheti karen

 

आलू के पौधे में पीला पन देखने को मिलता है , इस प्रकोप से बचने के लिए फंगीसाइड्स दवाइयों का स्प्रे करना बहुत जरुरी होता है । जब आलू की फसल 25 से 30 दिन की हो जाए तब स्प्रे करें , स्प्रे करने के लिए ,(Gromor 19 19 19 Acuspray 500 gram) ( Indofil M-45 200 gram) ( Actara syngenta 50 gram) इन  सभी दवाइयों को  200 से 250 लीटर पानी के साथ घोल बनाकर स्प्रे करें प्रति एकड़ के हिसाब से , आलू के पौधे में लगने वाले कीट फंगस बीमारी से बचाया जा सकता है । आलू की फसल 20 से 25 दिन की हो जाए , तब खाद डालें  , यूरिया खाद 50 किलोग्राम , सागरिका 10 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें , इसके बाद दूसरी बार खाद देने का समय 45 से 50 दिन के बाद ,( maignesium sulphate 10 kg) (ferrous sulphate 10 kg) (micronutrients 6 kg ) इन सभी खाद को एक साथ मिलाकर प्रति एकड़ के  हिसाब से छिड़काव करें , आलू की फसल तैयार होने का समय 90 से 100 दिन तक का होता है । कुछ किस्में 100 से 120 दिन तक की होती है ।

 

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