Barbati ki , आधुनिक खेती करके कमाएं लाखों ?

barbati ki , खेती तीनो  सीजन में की जा सकती है ,  गर्मी , ठंडी , बरसात इन तीनों सीजन बरबटी के फसल के लिए  उपयुक्त होता है , गर्मी के दिनों में फरवरी से मार्च तक , बरसात में जून से जुलाई और ठंडी में अक्टूबर से नवम्बर इन सभी सीजन में बरबटी की खेती से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है , बरबटी एक हरी ताजी सब्जी होती है , और विटामिन प्रोटीन फाइबर से भरपूर होती है , जो इसकी मांग बाजारों में हमेशा बनी रहती है ।

Barbati ki adhunik kheti

 Barbati ki kheti की तैयारी और देखभाल

 

बरबटी की खेती के लिए तापमान 15°c डिग्री  सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस तक अनकूल होता है  , बरबटी के फसल के उत्पादन के लिए हल्की मिट्टी , काली मिट्टी , दोमट मिट्टी चिकनी मिट्टी , रेतीली मिट्टी सभी तरह की मिट्टी उपयुक्त होती है , मिट्टी का ph 5.5 से 6.5 तक अच्छा होता है , फसल की अच्छी उत्पादन के लिए मिट्टी की उर्वरता अच्छा होना बहुत जरुरी होता है , मिट्टी की अच्छी उर्वरता के लिए गोबर की खाद 3 से 4 ट्राली  प्रति एकड़ के दर से खेत में डाल कर फैला दें , और खेत की गहरी जोताई 2 से 3 बार करें , और मिट्टी को रोटावेटर से अच्छी तरह से भुरभुरी बनालें ।

 

बरबटी की उन्नत किस्म , बरबटी की बुवाई के लिए सही उन्नत किस्म का होना बहुत अहम होता है , (अंकुर गोमती ) ऐ किस्म अधिक से अधिक पैदावार और अच्छी गुणवत्ता देने वाली फलियों के लिए विकसित की गई है ( Syngenta Yb )अच्छी उपज रोग के प्रति सहनशील काफी अच्छी  किस्म होती , ( NSG Lobia f1 ), (अंकुर vu -5 किस्म )  (कशी कंचन ) ऐ सभी किस्म एक अच्छी पैदावार देने वाली होती है । बीज की लागत प्रति एकड़ के दर से लगभग 3 किलोग्राम से लेकर 3.5 किलोग्राम तक की आवश्यकता होती है ?

 

बरबटी के बीज के अच्छे अंकुरण जमाव और कीट फंगस के प्रकोप के बचाव के लिए बीज उपचार करना जरुरी होता है , 5 ग्राम  कार्बेन्डाजिम 12% मैंकोजेब 63%  फंगीसाइड से बीज उपचार करें , अगर बीज हाइब्रिड किस्म है तो इसके लिए ट्राइकोडर्मा 5 ग्राम , प्रति किलोग्राम बीज की मात्रा के दर से बीज उपचार करें ।

 

बरबटी की बुवाई  बैड विधि से करना ज्यादा बेहतर होता है , क्योंकि बैड विधि से बरबटी की बुवाई करने से , पौधे के जड़ों का काफी अच्छे से विकास होता है , और पौधे का बढ़बार तेजी से होता है , बैड बनाने के लिए  बैड मेकर या बैड राइजर के मदद से बैड को तैयार करें , और बैड की दूरी 2.5 फीट बैड की ऊंचाई 10 से 12 इंच तक होनी  चाहिए ,

 

खाद उर्वरक

 

खाद उर्वरक , बुवाई के समय खाद उर्वरक की मात्रा , DAP खाद 40 किलोग्राम , SSP खाद 40 से 45 किलोग्राम , MOP खाद 25 किलोग्राम प्रति एकड़ के दर से खाद उर्वरक का प्रयोग करके खेत की बुवाई करें । बुवाई और पौधे की दूरी पौधे से पौधे की दूरी 2 फीट , लाइन से लाइन की दूरी 3 से 3.5 फीट  बीज की गहराई 3 सेंटीमीटर तक होनी  चाहिए , बरबटी के पौधे के पकड़ और बढ़बार के लिए मंडप या लकड़ी का सहारा देना जरुरी होता है , क्योंकि पौधा लकड़ी , मंडप के सहारे से अच्छे से फैलता है और पौधे के फूलों फलों का अच्छे से विकास हो पाता है ,

 

बरबटी की फसल की सिंचाई , बरबटी की फसल की सिंचाई भूमि पर निर्भर होती है , काली दोमट मिट्टी में  सिंचाई की  जरुरत थोड़ा कम होती है , हल्की मिट्टी रेतीली मिट्टी में सिंचाई की आवश्यकता ज्यादा होती है , पौधे के जरुरत के अनुसार 7 से 10 दिन में सिंचाई करें । फसल में खरपतवार नियंत्रण , निराई गुड़ाई के माध्यम से फसल में होने वाले खरपतवार को निकाल दें , फसल में खरपतवार होने से पौधे और फसल की वृद्धि  में बहुत  कमी होती है , खरपतवार होने से समय समय पर निराई गुड़ाई करें ,या फंगीसाइड्स   ( Glyphosate 41% sl 1 लीटर , 200 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें ।

barbati ki fasal

बरबटी की फसल में कीट बीमारी का प्रकोप , फली छेदक , लीप माइनर , सफ़ेद मक्खी , पीला मोज़ेक  वायरस जैसे प्रकोप देखने को मिलता है , इसके नियंत्रण के लिए ( Bayer Antracol 40 gm ) ( Syngenta Actara 8 gm) 15 लीटर पानी में घोल बना कर स्प्रे करें । होने वाले कीट फंगस की समस्या से फसल को बचाया जा सकता है ।

 

बरबटी की फसल में खाद देने का समय जब फसल 20 से 30 दिन की हो जाए , यूरिया खाद 30 किलोग्राम ,  micronutrients खाद 5 किलोग्राम प्रति एकड़ के दर से खेत में छिड़काव करके सिंचाई करें ,  और इसके बाद खाद देने का समय 50 से 60 दिन के अंदर  में खाद का छिड़काव करें , barbati ki  फसल का उत्पादन लगातार 5 से 6 महीने तक चलता रहता है , अगर वैज्ञानिक तरीके से खेती  करते है , तो फसल में काफी उत्पादन मिलता है ,  

 

 

 

 

 

 

 

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