bhindi ke paudhe men , भिन्डी के फसल में कई तरह के कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है , यह एक गंभीर समस्या होती है , जो भिन्डी के फसल को काफी नुकसान पहुँचाती है , पौधे में लगने वाले तना छेदक कीट पौधे के तने पत्तियों के अंदर घुसकर काट देते है , और पौधा कमजोर होकर सूख जाता है ।

Bhindi ke paudhe men लगने वाले कीटों से बचाव
भिन्डी के फसल में कई तरह के कीटों का हमला होता है , जैसे की फल छेदक सुंडी , सफ़ेद मक्खी , चेपा माहू , रस चूसक कीट , लाल मकड़ी अनेक प्रकार के कीटों का प्रकोप होता है । फल छेदक सुंडी जो होती है , जब पौधा बढ़वार ले रहा होता है , तब उस समय पौधे की शाखाओं में पैदा होती है , पौधे के पत्तियों में यह कीट हमला करने लगता है , पौधे की पत्तियाँ कटने लगती है , अगर इस बीमारी का लक्षण शुरुआती समय में दिखाई दे रहा है , इसका आसान तरीका अपनाएं , संक्रमित पौधा को उखाड़कर खेत से बाहर कर देना चाहिए ।
इसके अलावा जैविक तरीके से उपचार करें , जैविक तरीके से उपचार करने के लिए , नीम तेल पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करें , 10 से 15 दिन के अंतराल में छिड़काव करते रहें , अगर इस बीमारी का प्रकोप बहुत ज्यादा मात्रा में बढ़ रहा है । रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए , रासायनिक कीटनाशक ,(Spinosad 45%SC 1ml ) या ( (Imidacloprid 17.1%SL ) 1.ml 15 लीटर पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करें ,
चेपा माहू , इक कीट का प्रकोप पौधे के नए भागों में दिखाई देता है । पत्ते , फल जैसे भागो में होता है , जिस जगह में रहते है , उस जगह में सहद जैसे पदार्थ छोड़ते है , और उस जगह में काले काले दाग जैसे हो जाता है , इससे पता चलता है, की पौधे में माहू का प्रकोप हो रहा है , इस बीमारी से बचाने के लिए , संक्रमित भाग को काट देना चाहिए , इसके अलावा ( Dimethoate 30%EC) 300.ml पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें ।
रस चूसक समस्या , भिन्डी के पौधे में ऐ भी समस्या बहुत होती है , पत्तियों का रस चूस कर पत्ते में छेंद और पीला कर देते है , फिर पत्तिया पौधे से टूट कर गिर जाती है , इस समस्या के लिए , (Dimethoate 30%EC) पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करें , इसके अलावा भिन्डी के फसल में लाल मकड़ी का प्रकोप देखने को मिलता है , यह कीट का प्रकोप पत्ते के निचले सतह पर होता है , पत्ते में सफ़ेद रंग के धब्बे बन जाते है , और पत्तियां मुड़ने लगती है , इस कीट से बचाव के लिए ( Chlorfenapyr 10%SC) इस दवाई को पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करें , इन दवाइयों के उपयोग करने से होने वाली समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है । फसल की देखभाल करना बहुत जरुरी होता है , अगर कोई भी बीमारी दिखाई दे रही है , तो उसका इलाज तुरंत करें , फसल की समय से देखभाल करेने से फसल को नुकसान होने से बचाया जा सकता है , जितना फसल स्वस्थ रहेगी उतना ही ज्यादा फसल में उत्पादन होगा ,
