Chane ki kheti , रबी सीजन की फसल है , जो भारत के कई राज्यों में इसकी खेती बहुत ज्यादा मात्रा में की जाती है । चने का उपयोग काफी मात्रा किया जाता है , चाहे दाल को रूप में या साग भाजी हो भिविन्न प्रकार के व्यंजनो में चने का उपयोग किया जाता है , और चना स्वास्थ के लिए भी काफी अच्छा होता है ।

Chane ki kheti और देखभाल
चने की खेती के लिए , दोमट मिट्टी, काली मिट्टी रेतीली दोमट मिट्टी ऐ सभी मिट्टी में चने का उत्पादन अच्छा हो पाता है , खेती की तैयारी के समय खेत की अच्छी उर्वरता के लिए गोबर की खाद देना जरुरी होता है , 2 से 3 ट्राली गोबर की खाद का छिड़काव करें , खाद का छिड़काव होने के बाद खेत की गहरी जोताई करे , और खेत को अच्छी तरह भुरभुरी बनाकर तैयार करें , खेत की जल निकासी अच्छी होनी चाहिए , ऐ भी बहुत जरुरी होती है । क्योंकि खेत में जल भराव की समस्या अगर होती है , हो तो फसल पूरी तरह से नस्ट हो जाती है , इसलिए जल निकासी की व्यवस्था अच्छी हो ताकि फसल को कोई नुकसान न हो और चने की फसल से अच्छा उत्पादन मिल सके ।
चने की उन्नत किस्में , चने की उन्नत किस्मों का भी चुनाव करना बहुत महत्वपूर्ण होता है , क्योंकि चने की किस्म और सही समय कम लागत में चने की अच्छी गुणवत्ता और उत्पादन मिल सके , जैसे की , दफ्तरी 21 चना एक हाइब्रिड चना होता है , यह एक लाल दाने वाला और इसके पौधे अच्छे घेरदार होते है , फुले विक्रम चना , ऐ सिंचाई वाले इलाको के लिए काफी अच्छा माना जाता है , पूसा मानव किस्म भारती कृषि अनुसंधान द्वारा विकसित किया गया है , जो की बिल्ट , फली छेदक , इल्ली जैसे कीट रोगों से लड़ने की क्षमता अच्छी होती है । RVG 202 ऐ किस्म देर से बुवाई के लिए भी काफी अच्छी मानी जाती है , ऐ सभी किस्मों में ज्यादा से ज्यादा पैदावार लिया जा सकता है ।
चने की फसल को कीट फंगस से बचाने और बीज के अच्छे जमाव के लिए बीज उपचार करना बहुत महत्वपूर्ण होता है, UPL Electron 2ml प्रति किलोग्राम बीज की मात्रा के साथ बीज उपचार करें और इसके आलावा , Syngenta vibrance – integral , इन दोनों कीटनाशक के मदद से बीज उपचार करें । चने बीज की मात्रा बुवाई के लिए प्रति एकड़ 30 से 35 किलोग्राम तक की होती है
चने की बुवाई का सही समय अक्टूबर से 15 नवम्बर बहुत अच्छा समय माना जाता है , और चने की फसल से अच्छा उत्पादन से जुड़े पहल जैसे की जलवायु ,मौसम मिट्टी, खाद उर्वरक बहुत जरुरी होता है , चने की बुवाई के समय खाद की मात्रा , DAP खाद 50 किलोग्राम , MOP खाद 30 किलोग्राम , बेंटोनाइट सल्फर 5 किलोग्राम , सागरिका दानेदार 10 किलोग्राम इन सभी उर्वरक खादों को प्रति एकड़ के अनुसार मिलाकर बुवाई के समय खेत में डाल कर बुवाई करें , चने की बुवाई छिड़कन विधि या सीड ड्रिल के माध्यम से बुवाई की जा सकती है ,

चने की फसल में ज्यादा सिंचाई की जरुरत तो नहीं होती है , लेकिन फिर भी एक से दो बार सिंचाई से फसल तैयार हो जाती है , चने की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए फंगीसाइड्स का उपयोग करना ज्यादा उचित नहीं होता है क्योंकि फंगीसाइड्स के उपयोग से चने की फसल में झटका आता है और फसल के उत्पादन में कमी होती है , इसके लिए निराई गुड़ाई के माध्यम से खरपतवार निकालना ज्यादा बेहतर और फायदेमंद होता है ।
चने की फसल में होने वाले कीट फंगस , जैसिड सफेद मक्खी थ्रिप्स जैसी समस्या देखने को मिलती है , इसके लिए Beta- Cyfluthrin imidacloprid . Antracol fungicide , फंगीसाइड्स का उपयोग करके छिड़काव करें होने वाले कीटों के प्रकोप से चने की फसल को बचाया जा सकता है । चने की फसल तैयार होने में लगभग 120 से 145 दिन में तैयार हो जाती है , देशी चना थोड़ा कम समय में तैयार हो जाता है , और हाइब्रिड चना थोड़ा ज्यादा दिन लग जाता है । चने की खेती की अच्छी देखभाल और रख रखाव करके 15 से 20 क्विंटल तक उपत्पादन प्रति एकड़ लिया जा सकता है ।
