Jut ,की खेती कैसे करें ?

jut एक ऐसा पौधा है जिसके तने के अंदर लंबे, मजबूत रेशे होते हैं। लोग इसे पाटा, पटुआ या अमारी जैसे नामों से भी पुकारते हैं। जूट के पौधे से प्राप्त रेशे प्राकृतिक और उपयोगी होते हैं। इन रेशों का उपयोग हम बोरे, रस्सियाँ, चटाई और सुतली जैसे चीज़ें में करते हैं। भारत के कई हिस्सों में, खासकर बंगाल, बिहार, असम, ओडिसा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जूट की  खेती होती हैं। इन जगहों पर किसान खूब जूट उगाते हैं।

 

 

Jut ki kheti kaise karen

Jut ki kheti की तैयारी

जूट के खेत में पौधे रोपने की तैयारी करते समय, आप कम्पोस्ट या पशु अपशिष्ट जैसी चीजों से बनी प्राकृतिक खाद के साथ, साथ कुछ विशेष रासायनिक उर्वरकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे मिट्टी स्वस्थ और पोषक तत्वों से भरपूर रहती हैं, जिससे पौधे मजबूत और खुशहाल तरीके से विकसित हो पाते हैं। अपने जूट के पौधों की उगाने के लिए, आपको सबसे पहले मिट्टी तैयार करनी होगी। मिट्टी की अच्छी उपजाऊ बनाने के लिए खाद उर्वरक,

खेत की तैयारी के समय खाद उर्वरक 

  • गोबर की खाद 4 ट्राली
  • युरिया खाद 170 किलोग्राम
  • एसएसपी खाद 150 किलोग्राम
  • पोटाश 50 किलोग्राम

प्रति एकड़ के दर से खेत की तैयारी के समय उपयोग करें, जो पौधों को मजबूत बनाने में मदद करता हैं। जूट उगाने के लिए सबसे अच्छी मिट्टी,

  • दोमट मिट्टी
  • काली दोमट
  • चिकनी मिट्टी

ऐ सभी मिट्टी पौधों की अच्छी बढ़बार और उत्पादन के लिए बेहतर होती हैं, खेत की 3 या 4 बार गहरी जुताई करें अर्थात मिट्टी को पलट दें, ताकि वह नरम और ढीली हो जाए। मिट्टी को समतल और भुरभुरी बनालें , मिट्टी बारीक और समतल होनी चाइए, जिससे बड़े बड़े ढेले न हों। यह भी सुनिश्चित करें की खेत में पानी अच्छी तरह निकलता हों ताकि अतरिक्त पानी निकल सके। अगर पानी खेत में ज्यादा देर तक रहता हैं, तो यह जूट के पौधों को नुकसान पहुंचा सकता हैं और उनकी वृद्धि को कम कर सकता हैं।

Khet ki tayari

जूट के पौधे लगाने का समय आमतौर पर मार्च से जून या जुलाई तक होता हैं, लेकिन मौसम,जमीन और जहाँ इसे उगाया जाता हैं, उसके आधार पर यह थोड़ा पहले या बाद में भी हों सकता हैं। जूट की कुछ खास किस्में होती हैं जो बेहतर तरीके से उगती हैं, जिन्हे उन्नत जूट किस्में कहा जाता हैं।

जूट की उन्नत किस्म और बुवाई

  • JRC 321
  • JRC 212
  • JRC 698
  • JRO 632
  • JRO 621

ऐ सभी किस्में अच्छी उत्पादन और गुणवत्ता वाली मानी जाती हैं।

jut  के बीजों को जमीन पर फैलाकर या मशीन की मदद से से बो सकते हैं। एक एकड़ जमीन के लिए लगभग 5 से 6 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती हैं। रोपण के  बाद, हल्की सिंचाई करनी चाहिए। फिर लगभग एक हफ्ते बाद, पौधों को फिर से सिंचाई करें,  लगभग 15 से 20 दिनों के बाद सिंचाई करें। उसके बाद आपको हर महीने पौधों को एक बार सिंचाई करनी  चाहिए। पौधों को सही समय पर सिंचाई करेने  से पौधों को  मजबूत होने में मदद मिलती हैं। कभी- कभी जूट के पौधों पर कीड़े या रोग लगते हैं। ये कीड़े पत्तियों को पीला कर देते हैं, और तने के सड़ने के कारण बन जाते हैं। जिससे पौधा पूरी तरह से बर्बाद हों जाते हैं।

Jut ki kheti

जूट के पौधों को स्वस्थ और तना सड़न जैसी बिमारियों से मुक्त रखने के लिए, बीजों को ट्राइकोडर्मा नामक एक विशेष कीट नाशक से उपचारित करना चाहिए, प्रति किलोग्राम बीज के साथ लगभग 4 से 5 ग्राम की दर से उपचारित करें । इसके बाद जड़ सड़न नामक एक और समस्या हों सकती हैं, जिसमें पौधे की जड़ें सड़ने लगती हैं। इसे रोकने के लिए, कार्बेन्डाजिम नामक दवा  4 ग्राम मात्रा को प्रति  लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर छिड़काव करें। इससे जड़ें स्वस्थ रहती हैं। खेत में खरपतवार यानि अवांछित पौधे नियमित रूप से हटाना भी बहुत जरुरी हैं। जब पौधे स्वस्थ और मजबूत होते हैं, वे अचिक जूट पैदा करते हैं।

jut के पौधे को बढ़ने और तोड़ने लायक होने में लगभग 4 से 5 महीने लगते हैं। काटने के बाद उन्हें लगभग 2 से 3 हफ्ते पानी में रखा जाता हैं। इससे पौधे के तने मुलायम रेशे निकलने में मदद मिलती हैं। रेशों को अलग करने के बाद, उन्हें बड़लों में इकट्ठा करके बाजार में बेच दिया जाता हैं।

 

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