Kapas ki kheti भारत में लगभग सभी राज्यों में की जाती है । कपास की खेती करने के लिए सबसे उपयुक्त समय अप्रैल महीना होता है । और कुछ राज्यों में मई महीने में भी कपास की बुवाई की जाती है । कपास की बुवाई मानसून आने से पहले कर देनी चाहिए । ज्यादा अच्छा होता है ,

kapas ki khet की तैयारी
kapas ki kheti करने के लिए खेत की तैयारी और मिट्टी का प्रकार अच्छा होना चाहिए , खेत की अच्छी तरह से जोताई करे और खेत को तीन से चार बार गहरी जोताई करें , जोताई के बाद खेत में पाटा चलाएं khet को अच्छी तरह भुरभुरी बना लें । कपास की खेती के लिए मिट्टी का ph 5.5 से 6.5 तक अच्छा होता है । कपास की खेती के लिए मिट्टी का प्रकार , जैसे ,दोमट मिट्टी , रेतीली दोमट मिट्टी , बुलई दोमट मिट्टी , कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है , और उत्पादन भी अच्छा देखने को मिलता है ।
खेत तैयार करते समय खादों का प्रयोग करें , गोबर की खाद 3 से 4 ट्राली , (DAP 50 किलोग्राम ) SSP सिंगल सुपर फॉस्फेट 50 किलोग्राम ) MOP म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 से 35 किलोग्राम ) रिजेंटा अल्ट्रा एक बैग ,खेत की तैयारी के समय प्रयोग करें प्रति एकड़ के हिसाब से । कपास की खेती बेड विधि से करना ज्यादा अच्छा होता है । बेड से बेड की दूरी 4 फिट और बेड की चौड़ाई 2.5 फिट बेड की ऊंचाई 1 फिट होना चाहिए । खेत में जल निकासी अच्छी होनी चाहिए ,
कपास की उन्नत किस्में
कपास की उन्नत किस्में सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्में ।
- Rasi -926 , ऐ किस्म मध्य से हल्की मिट्टी में भी अच्छा उत्पादन होता है । जहाँ पानी कम होता है , वहां भी उत्पादन अच्छा होता है । फसल तैयार होने में लगभग 170 से 180 दिन लग जाता है ।
- Rasi-773 , यह किस्म कीटों से ज्यादा प्रभावित नहीं होती है । और भारी से भारी मिट्टी से उत्पादन देती है । और तैयार होने में लगभग 160 से 170 दिन में तैयार हो जाती है ।
- Nuziveedu seeds , इस फसल में पानी की ज्यादा जरुरत होती है । लेकिन इसक भी उत्पादन अच्छा होता है । और 150 से 160 दिन में तैयार हो जाती है ।
- Us 51- cotton , हल्की मिट्टी में भी इसका उत्पादन अच्छा होता है । फसल तैयार में लगभग 170 से 180 दिन तक होता है ।
कपास की फसल की इन सभी वैरायटी जो बाजार में ज्यादा चल रही है । और इनका उत्पादन भी अच्छा होता है । कपास की बुवाई करने से पहले बीज उपचार जरूर करें । बीज उपचार करने से फसल में आने वाले कीट बीमारियों से बचाव होता है । जैसे की , इलेक्ट्रान फंगीसाइड्स , जेलोरा फंगीसाइड्स किसी भी एक फफूंदनाशक दवाई से बीज उपचार करें , लगने वाले कीटों की समस्या नहीं होगी , कपास की बुवाई करते समय ध्यान दें , कपास के पौधे की दूरी 2 फिट , लाइन से लाइन की दूरी 4 फिट होनी चाहिए , और बीज की गहराई 4 से 5 सेंटी मीटर तक होनी चाहिए । कपास की फसल में विल्ट , उकठा जैसी समस्या होती है । तो जब कपास की फसल 20 से 30 दिन की हो जाएं । तब इसके लिए ट्राइकोडर्मा 500ml से 1 लीटर तक ,सिंचाई करते समय प्रयोग करें , kapas ki kheti

कपास की फसल को सही समय और सही टाइम में फंगीसाइड का उपयोग करके फसल में स्प्रे करना बहुत जरुरी होता है । इससे फसल की अच्छी पैदावार होती है । और फसल स्वस्थ रहती है । कपास की फसल में और बहुत सारे कीट , एफिड की समस्या होती है । जैसे की , थ्रिप्स , ब्लैक थ्रिप्स सफ़ेद मक्खी , हरा मच्छर , गुलाबी सुंडी , वालवर्म जैसे कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है । इनसे बचने केलिए , Rogor 300ml) Proclaim 80gr ) Indofilm45 400 gr)
200 लीटर पानी के साथ घोल बनाकर स्प्रे करे । प्रति एकड़ के हिसाब से । स्प्रे करने से कीटों की समस्या फसल में नहीं होती , और फसल में अच्छा विकास देखने को मिलता है । कपास की फसल में सिंचाई की आवश्यकता बुवाई के 2 से 3 सप्ताह के बाद होती है । और बाद में 2 सप्ताह के बाद सिंचाई की जरुरत होती है , कुल सिंचाई की जरुरत 6 से 7 बार सिंचाई की जरुरत होती है । कपास की फसल तैयार होने में लगभग 150 से 170 दिन कुछ किस्में 180 से 90 दिन तक की होती है ।
