Karele ki kheti , करके हो जाए मालामाल

Karele ki kheti एक ऐसी फसल है , जिसका मंडी में करेले का भाव पूरे साल काफी अच्छा देखने को मिलता है । इस फसल में कारण सिर्फ इतना होता है । की करेले की फसल से उत्पादन लेना बहुत ही मुश्किल होता है , अगर करेले की फसल से  किसान उत्पादन ले लिए  तो कोई भी फसल को लगाकर उत्पादन ले सकते  है , यानि की करेले की फसल से उत्पादन लेना कठिन और चुनौती भरा  होता  है ।

 

Karele ki kheti karke ho jayen malamal

Karele ki kheti और खेती करने का तरीका

 

करेले की खेती करने का समय गर्मी और बरसात के सीजन में होता है , गर्मियों के लिए करेले की बुवाई जनवरी से फरवरी , मार्च तक की  होती  है , और बरसात के सीजन में जून से जुलाई , अगस्त तक करेले की बुवाई करने का अच्छा समय माना जाता है । करेले की फसल के लिए तापमान 20°C डिग्री  सेल्सियस से 40°C डिग्री सेल्सियस तक उपयुक्त माना जाता है । इसके बीच के तापमान में करेले के पौधे का अच्छा विकास होता है ।

 

करेले की फसल के लिए मिट्टी का प्रकार  लेकिन करेले की फसल के लिए सभी तरह की मिट्टी में खेती की जा सकती है , मिट्टी में पोषक तत्व मौजूद होना जरुरी होता है । खेत में ड्रिप सिंचाई की सुबिधा उपलब्ध है तो  करेले के बीज की बुवाई बैड विधि से करना ज्यादा बेहतर होता है । करेले की बुवाई के लिए अच्छे बैड का निर्माण करें ।बैड की चौड़ाई  2 फिट  , बैड से बैड की दूरी 4 फिट , बैड की ऊंचाई 12 से 14 इंच तक रखें बैड तैयार होने के बाद मल्चिंग पेपर 25 माइक्रोन का स्तेमाल करके बैड के ऊपर बिछा दें , बैड के ऊपर कतार से कतार गढ़ा और गढ़े में बीज की बुवाई करें ।

 

किसानो के मन में ऐ भी चलता होगा की मल्चिंग पेपर और ड्रिप की सुविधा अगर न हो तो उस जगह में करेले की खेती क्या की जा सकती है तो हा फिर भी करेले की खेती की जा सकती है , करेले की खेती साधारण तरीके से भी की जा सकती है । और साधारण तरीके से सिंचाई की जा सकती है । करेले की बुवाई के लिए एक अच्छी बीज का चुनाव करना होता है , जिससे कीट बीमारी की समस्या न हो और उत्पादन अच्छा हो सके ।

 

करेले की वैराइटी किस्म

 

  • ( Seminis Abhiskek seed)
  • (East west prgati 065F1 seed )
  • ( Amber vnr seed )
  • ( Rapid 128 seed)
  • ( Rushaan Karela seed)

इन सभी बीज का उपयोग करके करेले की फसल से अच्छा उत्पादन किया जा सकता है , बीज की मात्रा प्रति एकड़ 600 से 700 ग्राम तक की आवश्यकता होती है , केरेले की फसल में खाद उर्वरक बुवाई से पहले बैड तैयार करते समय (DAP खाद 50 किलोग्राम ) ( MOP खाद  45 से 50 किलोग्राम ) ( Magnesium Sulphate 15 किलोग्राम ) प्रति एकड़ के दर से  सभी खाद को एक  साथ चलाकर बैड के ऊपर डाल कर अच्छे से मिट्टी में मिला दें । बैड को अच्छी तरह से तैयार करके करेले की बुवाई करें ।

Karele ki kheti se kamayen lakhon

करेले  के पौधे के लिए बहुत जरुरी चीज होता है की पौधे को सहारा देना ताकि पौधे का बेल अच्छे से चढ़ सके और करेले के पौधे का अच्छा विकास हो सके इसके लिए मचान बनाना जरुरी होता है ,  जब फसल 20 से 25 दिन की हो जाए तब  बॉस की लकड़ी के मदद से खंभा लगाए ,  कतार से कतार लगाएं और खंभे की दूरी 10 से 10 फिट तक रखें और खंभे में तार लगाकर मचान तैयार करें । करेले के पौधे से जब पहली बार फसल की तोड़ाई हो जाए तब करेले की फसल में खाद डालें । ( NPK 12.61.00 5 किलोग्राम ) ( Magnesium Sulphate 1 किलोग्राम ) ( NPK 13 . 00 . 45 , 5 किलोग्राम ) (Calcium Nitrate 5 किलोग्राम ) प्रति एकड़ के हिसाब से सभी खाद को मिलाकर छिड़काव करें और पौधे की हल्की सिंचाई करें । करेले की फसल 4 से 5 महीने तक चलती रहती है और सही तरीके से करेले की देखभाल होती है तो करेले का उप्तादन प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल तक होता है ।

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