Litchi ki kheti

litchi ki kheti, लीची एक रसीला और स्वादिष्ट फल है , लीची की पैदावार के लिए बलुई मिट्टी ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है । क्योंकि बलुई मिट्टी होने से पौधों की जड़ गहराई तक जाती है , इससे पौधे का विकास काफी अच्छे से होता है , खेत की जल निकासी अच्छी होनी चाहिए , खेत के अंदर पानी का भराव न हो , पानी का भराव होने से पौधों का विकास सही तरीके से नहीं हो पाता , लीची की खेती के लिए तापमान , 25°c डिग्री सेल्सियस से 35°c डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा उपयुक्त होता है ।

Lithic ki kheti

 Litchi ki kheti की तैयारी और उन्नत किस्म

 

litchi ki kheti  की तैयारी , खेत की तिरछी जोताई , दो से तीन बार गहरी जोताई करें , जोताई के साथ पाटा लगाएं , खेत को अच्छी तरह समतल बनालें , और खेत का ढलान एक तरफ बनालें क्योंकि खेत में जमा पानी एक बार में निकल सके , खेत तैयार होने के बाद , खेत में गड्ढा खोदें , गड्ढे का आकार 3 फिट गहरे , और 2.5 से 3 फिट चौड़ा बनाएं , गड्ढा तैयार होने के बाद 10 से 15 दिन के लिए तेज घूप में खुला छोड़ दें , इसके बाद गड्ढों में गोबर की खाद MOP खाद ,  farm manure, खाद , Bonemeal, खाद सभी खादों को गड्ढे के मिट्टी के साथ मिलाकार गड्ढों को भर दीजिये , गड्ढा भरने के बाद पानी डालदें , इसके बाद 10 से 12 दिन के बाद पौधा लगा दें । एक एकड़ में लीची का पौधा लगभग 80 से 100 ,पौधा लगाएं , पौधे से पौधे की दूरी 24 से 25 फिट की दूरी और पौधे की लाइन से लाइन की दूरी 30 फिट तक ज्यादा उपयुक्त होती है ।

 

लीची की उन्नत किस्म , शाही लीची ऐ किस्म ज्यादा उत्पादन देने वाली होती है , दूसरी किस्म  , देशी लीची , इसका फल मीडियम साइज में होता है , ऐ किस्म नियमित रूप से फल आते है , तीसरी किस्म , बेदना , और चौथी किस्म , रोज सेंटेड , यह लीची की अच्छी किस्म मानी जाती है , और इसका स्वाद भी काफी अच्छा होता है । ऐ सभी किस्में के अच्छी पैदावार देने वाली होती है ।

 

लीची का पौधा लगाने के एक हफ्ते में दो बार सिंचाई करनी पड़ती है , पौधे की कम आयु होने के कारण सिंचाई जल्दी जल्दी करनी पड़ती है । पौधा बड़ा होने के बाद मौसम , जलवायु के हिसाब से सिंचाई नर्भर होती है । पौधे में खाद देने का समय , वर्मीकम्पोस्ट , SSP खाद , यूरिया खाद , इन सभी खादों को मिलाकार प्रति पौधों की मात्रा के हिसाब डालें , खाद डालने के बाद तुरंत हल्की सिंचाई करें , लीची के पौधे लगने वाले कीट , फंगस , इससे बचाव बहुत जरुरी होता है । क्योंकि कीट फंगस के प्रकोप से पौधा पूरी तरह नस्ट हो जाता है ।

 

लीची में लगने वाले कीट

लीची में लगने वाले कीट तीन तरह के होते है । लीची माइट , फल एवं बीज बेधक , और पत्ती काटने वाली सूंडी,  लीची माइट रस चूसने वाले कीट से पत्तियाँ सिकुड़ जाती है , निचली सतह पर मखमली गड्ढा बन जाता है , कीट से ग्रसित पत्तियां आपस में गुच्छा बना लेती है । प्रभावित टहनियों में फूल  एवं फल कम होता है , दूसरा कीट लीची मकड़ी अत्यंत सूक्ष्म होता  है , बलनकार सफ़ेद और चमकीले रंग का होता है , कीट के नवजात एवं व्यस्क दोनों कोमल पत्तियों की निचली सतह , टहनी एवं , पुष्वृत से चिपक कर लगातार रस चूसते रहते है , इसके रोक थाम के लिए जून महीने में फलों की तोड़ाई के उपरांत एवं दिसंबर, जनवरी में प्रभावित टहनियों के साथ सावधानी पूर्वक काट कर जला देना चाहिए , इसके अलावा डाइकोफाल 3 मिली प्रति लीटर पानी के साथ पहला छिड़काव सितंबर, अक्टूबर एवं , दूसरा छिड़काव फरवरी में करना चाहिए । कीटनाशक का प्रयोग फल तोड़ने के 15 दिन पहले बंद कर दें । 

 

लीची उत्पादकों के लिए प्रमुख समस्या बन जाती है । फल एवं बीज बेधक कीट , इस कीट का प्रकोप मई के अंत में शुरू हो जाता है । और बरसात होने पर बड़ी तेजी से फ़ैल जाता है । ध्यान से देखा जाए तो एक फल में एक ही सूंडी रहती है । जो डंठल के बिलकुल नीची पाई जाती है । इसके रोक थाम के लिए ट्राइकोग्रामा प्रति हेक्टेयर की दर से बौर निकलने के बाद मार्च के पहले सप्ताह एवं , फेरोमोन ट्रैप 15 प्रति हेक्टेयर की दर से पौधे की मध्य ऊंचाई पर प्रयोग करना चाहिए , इसके अलावा लीची का फल मटर के दाने के आकार के हो जाए तो पहला कीटनाशक छिड़काव कार्बारिल 50 wp 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकार प्रयोग करें । इसके बाद दूसरा कीटनाशक , छिड़काव फल पकने के 15 से 20 दिन पहले  cypermethrin 25 ec 3 मिली 10 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रयोग करें ,

 

लीची में प्रमुख लगने वाले रोग , झुलसा रोग इस रोग का लक्षण फलों पर दिखाई देता है । फलों के छिलके पर काले काले गहरे भूरे रंग धब्बे दिखाई पड़ते है । आगे चलकर बड़े आकार के धब्बों का फैलाव फल के आधे हिस्से पर हो जाता है । इस रोग के बचाव के लिए कॉपर आक्सीक्लोराइड 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के दर से घोल बनाकर छिड़काव करें अगर रोग की तीव्रता ज्याद होने पर इसके रोक थाम के लिए कार्बेन्डाजिम 50%wp  क्लोरोथालोनिल 75%wp 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के दर से घोल बनाकर छिड़काव करें । लीची का पौधा में फल आने में लगभग 5 से 7 साल लग जाता है ।

 

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