matar ki kheti एक ऐसी सब्जी है जिसका उपयोग घरों से लेकर बाजारों तक होता है , मटर की खेती ठंडी के सीजन में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में की जाती है । मटर की बुवाई करने के लिए सही समय और अच्छी किस्म का चुनाव करना जरुरी होता है , मटर की बुवाई का सही समय 20 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक ज्यादा उपयुक्त माना जाता ह
matar ki kheti की तैयारी और देखभाल
mtara ki kheti के लिए रेतीली मिट्टी , बुलई दोमट मिट्टी , चिकनी मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है , खेत की जोताई 2 से 3 बार गहरी जोताई करें और मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरी बनालें , खेत तैयारी के समय गोबर की खाद , (NPK 12 32 16 ) , रीजेंट जीआर दानेदार , सरसों की खली खेत सभी उर्वर को डाल कर खेत को तैयार करें , खेत में होने वाली पोषक तत्व की कमी नहीं होगी और फसल में काफी उत्पादन देखने को मिलेगा , खेत की बुवाई के समय खेत में नमी बना के रखे इससे बीजो का अच्छा जमाव होता है ।
mtara ki फसल से अच्छा उत्पादन और कम समय में तैयार हो जाए ऐसी बीजों का चयन करके बुवाई करें , तरह तरह की मटर की उन्नत किस्म है , कोई भी किस्म का चुनाव करके बुवाई करें , बीज की बुवाई करने के लिए बीज की दूरी 4 सेंटी मीटर , लाइन से लाइन की दूरी 20 से 25 सेंटी मीटर और बीज की गहराई 4 सेंटी मीटर तक ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है , बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर करें , बीज उपचार करने के लिए थायरम , कार्बेन्डाजिम जैसे कीटनाशक दवाई से बीज उपचार करें ,
mtara ki फसल में होने वाले कीट बीमारियों की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है , मटर की बुवाई के 8 से 10 दिन के बाद सिंचाई करें मटर की सिंचाई जरुरत के हिसाब पर करें ज्यादा पानी होने से पौधे को नुकसान होता है , इसलिए पानी का भराव न हो और पौधा सुरक्षित रहे , खेत में होने वाले खरपतवार को समय समय से निराई गुड़ाई करें , मटर की फसल में ज्यादा कीटों की समस्या देखने को तो नहीं मिलती है। अगर फली छेदक इल्ली का प्रकोप पौधे में पीला पन जैसी समस्या दिखाई दे रही तो , ( Emamectin benzoate 5%) (Acetemiprid 20 sp 10 gm ) इन सभी कीटनाशक दवाई को 15 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करे जब फसल 20 से 25 दिन की हो जाए

मटर की फसल को कीट बीमारियों के प्रकोप से बचाने के लिए समय से कीटनाशकों का उपयोग करें के फसल को स्वस्थ रखें , फसल के जरुरत के हिसाब से दवाइयों का स्प्रे करें , अगर फसल में पोषक तत्व की कमी होती है , तो उत्पादन में असर पड़ता है , फसल में पोषक तत्व की कमी को पूरा करने के लिए खाद उर्वर देना बहुत जरुरी होता है , खाद उर्वरक देने के लिए जिंक सल्फेट 33% , सूक्ष्म पोषक तत्व युक्त खाद , यूरिया खाद जैसे सभी खादों को मिलाकर कर छिड़काव करें , matar ki फसल तैयार होने में लगभग 65 से 70 दिन में तैयार हो जाती है , और कुछ किस्मे थोड़ा कम या ज्यादा समय ले लेती है । matar ki khet की अच्छी देखभाल करके अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है ।
