Sarso ki kheti का सही समय 20 सितंबर से 25 अकटूबर तक सरसों की बुवाई के लिए बहुत सही समय माना जाता है। sarso ki kheti अगर कर रहें है, तो सरसों बुवाई का सही समय जानना बहुत जरुरी होता है, सरसों की बुवाई उचित समय पर कर के एक अच्छा उत्पादन सरसों की फसल से लिया जाता सकता है, अगर सरसों की बुवाई अगेती की जाती है, उसमें तापमान होने के कारण पौधे ग्रो नहीं हो पाता है, अगर पौधा ग्रो हो भी गया तो पौधे में तरह तरह के कीट फंगस का प्रकोप हो जाता है।
और सरसों की बुवाई समय से न करके ज्यादा देर से बुवाई की जाती है, इसमें सरसों ग्रो हो जाएगा और कीट फंगस का भी ज्यादा प्रकोप नहीं होगा लेकिन ज्यादा देर से बुवाई करने से उत्पादन में भारी कमी होती है। इसलिए सरसों की बुवाई के लिए समय का ध्यान देना बहुत जरुरी होता है।
Sarso ki kheti की तैयारी

सरसों की बुवाई के लिए खेत की अच्छी तैयारी करना बहुत जरुरी होता है, खेत की गहरी जोताई 2 से 3 बार और मिट्टी को अच्छी भुरभुरी बनाले चाहिए। खेत में उत्तम जल निकासी हो खेत में पानी का भराव न हो सरसों खेती के लिए मिट्टी का प्रकार रेतीली मिट्टी, हलकी मिट्टी, दोमट मिट्टी, काफी अच्छी मानी जाती है। सरसों की फसल के लिए तापमान 25°c डिग्री सेल्सियस से 30° डिग्री सेल्सियस तक बहुत उपयुक्त माना जाता है। और इस तापमान में फसल अच्छी ग्रो करती है।
सरसों की फसल में सल्फर डालना बहुत जरुरी होता है। सरसों में सल्फर डालने से तेल की मात्रा बढ़ती है और सरसों की फसल में सल्फर डालने से फसल में होने वाले कीट फंगस जैसी समस्या से सुरक्षा मिलती है, पहली समस्या तो कीट फंगस और दूसरी समस्या ठंड पाले से सुरक्षा मिलती है
सरसों की उन्नत किस्म
- Pioneer 45S46 इस किस्म की हाइट लगभग 6 फीट तक जाती है। और अक्टूबर लास्ट तक इसकी बुवाई की जाती है।
- Advanta 414 सरसों उन्नत किस्म
- RTB-16 सरसों उन्नत किस्म
- Rasi 9922 सरसों उन्नत किस्म
- Shriram 1616 सरसों उन्नत किस्म
सरसों की ऐ सभी किस्मों से अच्छा उत्पादन लिया जाता सकता है, सरसों की बुवाई का सही समय को ध्यान में रखते हुए। सरसों की बुवाई करें।
सरसों की बुवाई और वेसल डोज
सरसों की फसल में सल्फर, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, बोरोन, कॉपर जैसे पोषक तत्व की पूर्ती के लिए, सरसों की बुवाई के साथ खाद उर्वरक।
- SSP खाद 50 किलोग्राम
- DAP खाद 50 किलोग्राम
- MPO खाद 30 किलोग्राम

सरसों की बुवाई के साथ इन सभी खाद मिलाकर बुवाई करें, प्रति एकड़ के दर से, सरसों की बुवाई की दूरी लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटी मीटर, पौधे से पौधे की दूरी 7 से 8 सेंटी मीटर और बीज की गहराई 3 से 4 सेंटी मीटर, सरसों की बुवाई इस विधी से करने से सरसों की फसल में अच्छी बृद्धि होती है, और पौधे का फैलाव और बढ़वार अच्छा हो पाता है, सरसों की बुवाई सीड ड्रिल या छिड़कन विधी से की जा सकती है।
सरसों की सिंचाई
सरसों की फसल में सिंचाई बुवाई से 20 से 30 दिन के अंदर पहली सिंचाई कर देनी चाहिए, और इसके बाद दूसरी सिंचाई सरसों की फसल में फूल की अवस्था के समय करनी चाहिए, फूल आने के समय सिंचाई करेने से फूलों की संख्या और दानों का भराव अच्छा होता है।
खरपतवार नियंत्रण
सरसों की फसल में खरपतवार होने पर निराई गुड़ाई के माध्यम से खरपतवार को निकाल दें, या कीटनाशक स्प्रे की मदद से खरपतवार का नियंत्रण करें। इसके लिए,( Pendimethalin 30%EC 1 लीटर ) 200 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें प्रति एकड़ के दर से करें, लेकिन ऐ स्प्रे बुवाई के 6 से 7 दिन के अंदर करें, ऐसे में खरपतवार का जमाव नहीं होगा,
सरसों की फसल में खाद डालने का समय
सरसों की फसल जब 30 से 35 दिन की हो जाए ,
- यूरिया खाद 25 किलोग्राम
- रैलिगोल्ड 8 किलोग्राम
- सल्फर 5 किलोग्राम
प्रति एकड़ के दर से छिड़काव करें, खाद छिड़काव करते समय ध्यान रखे की खेत में अच्छी नमी होनी चाहिए।
सरसों की फसल में कीट फंगस स्प्रे
सरसों की फसल में कीट फंगस जैसी समस्या हो रही है। तो कीट फंगस से सरसों की फसल को बचाने के लिए, (Carbendazim 50 WP 1 ग्राम ) प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें, होने वाले कीट फंगस जैसी समस्या कंट्रोल हो जाएगी।
सरसों की फसल तैयार होने का समय और उत्पादन
सरसों की फसल पक कर तैयार होने में 110 से 120 दिन में तैयार हो जाती है, और सरसों की फसल का उत्पादन लगभग प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल तक का उत्पादन होता है, अगर सरसों की फसल का सही समय और सही तरीके से खेती की जाती है,
