udad ki fasal men , कीट बीमारियों का प्रकोप बहुत ज्यादा होता है , उड़द की बुवाई के कुछ दिनों के जब पौधा खेत में बराबर आजाए तभी से देखभाल करना जरुरी हो जाता है , अगर कीटों का प्रकोप उड़द की फसल हो जाए तो उसे नजर अंदाज न करें , समय रहते कीटों का नियंत्रण करें , अगर समय से कीटों का नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल पूरी तरह से नस्ट हो जाती है , और काफी नुकसान होता है । उड़द की फसल में कीट बीमारी लगने का कारण मौसम खराब होना और लंबे समय तक तेज धूप करना इसी बजह से अनेक प्रकार के कीट बीमारियों लक्षण उड़द के पौधे पर दिखाई देता है ,

udad ki fasal men कीट नियंत्रण और देखभाल
उड़द की फसल में लगने वाली मक्खी सफेद रंग की होती है । ऐ पत्तियों के निचले सतह पर रहती है । और उसी सतह पर अंडा देती है । अंडे से बहुत सारी मक्खियाँ पैदा होती है । पौधे के पत्तियों में लग कर रस चूसने लगती है , और एक से दूसरे पौधे में बैठती है , इससे बीमारी का प्रकोप तेजी से फ़ैल जाता है । क्यों की ऐ वायरस जनक बीमारी होती है । यह मक्खी वायरस को अपने अंदर ले लेती है , ऐ मक्खी स्वस्थ पौधे पर जाती है , तो ऐ बीमारी उस पौधे पर भी हो जाती है , इस बीमारी को कंट्रोल करना बहुत जरुरी होता है , उड़द की फसल में बीमारी लगने का कारण ऐ भी हो सकता है , की बीज पुराने है , या बीज शुद्ध नहीं है , बुवाई करने से पहले बीज का उपचार करना बहुत जरुरी होता है , बीज उपचार करने के लिए नीम तेल से बीज का उपचार करें , बीज उपचार करने से होने वाली बीमारी को कम किया जा सकता है ।
इस बीमारी का उपचार प्राकृत तरीके से करने के लिए , जो पौधा बीमारी से ग्रसित हो उस पौधे को खेत से निकाल कर बाहर कर देना चाहिए , और नीम तेल का स्प्रे करें , फसल की निरंतर देख भाल करते रहे होने वाले प्रकोप से बचाया जा सकता है । और समय समय पर खरपतवारों को निकालते रहें , सफेद मक्खी से बचाव के लिए ( इमिडाक्लोप्रिड 30.5% एससी ) ,( डाइमेथोएट 30% ईसी ) इस दवाइयों को पानी के साथ घोल बनाकर स्प्रे करें , पौधे में पीलिया मोजेक , इल्ली , सफेद मक्खी जैसे वायरस इन दवाइयों के स्प्रे करके रोगों से बचाया जा सकता है , जिस क्षेत्र में कीटों का प्रकोप हो रहा है , उसके लिए गर्मियों में गहरी जोताई करें , खेतों की सर सफाई और खरपतवार नियंत्रण करें ।
